नगर निगम कटनी के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति सम्मान और प्रशासनिक मानदंडों पर हुए खुल्लम-खुल्ला हमले ने पूरे निगम के कर्मचारियों को हिला कर रख दिया है। यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए की जा रही विधिक कार्रवाई के दौरान निगम के कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे कर्मचारियों में काफी गुस्सा उत्पन्न हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 27 दिसंबर 2025 को नगर निगम के अतिक्रमण विभाग ने जिला और पुलिस प्रशासन के सहयोग से नीतिगत तरीके से सड़कों पर अव्यवस्थित खड़े वाहनों और दुकानों के सामने रखे माल को हटाने का कार्य शुरू किया। इसी बीच, श्री श्याम सुंदर पाण्डेय ने सड़क पर अपनी गाड़ी लगाकर यातायात में रुकावट पैदा कर दी। जब निगम के कर्मचारियों ने नियमों के अनुसार वाहन हटाने का अनुरोध किया, तो संबंधित व्यक्ति ने गुस्से में आकर कर्मचारियों से गाली-गलौज करना शुरू कर दिया।
यहां तक कि आरोप है कि उक्त व्यक्ति ने कर्मचारियों से मारपीट करने के लिए लाठी निकाल ली, निगमायुक्त के लिए अभद्र और अनुचित भाषा का प्रयोग किया और खुलेआम धमकी दी। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो विभिन्न सोशल मीडिया पर प्रसारित हो चुका है, जिससे नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों में तीव्र रोष उत्पन्न हो गया है।
एकजुट होकर सड़क पर उतरा निगम अमला
घटना के खिलाफ नगर निगम कटनी के सभी अधिकारी और कर्मचारी मिलकर थाना कोतवाली पहुंचे और दोषी व्यक्ति की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उन्हें सरकारी कार्य के दौरान इस तरह अपमानित और धमकाया जाएगा, तो यह पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर हमला है।
कर्मचारी संघों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो निगम कर्मचारी आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसके लिए प्रशासन पूरी तरह से जिम्मेदार होगा।
अधिकारी के सम्मान में कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े
नगर निगम कर्मचारियों का यह आक्रोश एक ही घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह संकेत करता है कि वे अपने अधिकारियों के सम्मान, प्रशासनिक गरिमा और कानून व्यवस्था के प्रति पूरी मजबूती से खड़े हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अधिकारियों पर की गई अभद्र टिप्पणी पूरे निगम परिवार का अपमान है।
कानून बनाम दबंगई की निर्णायक घड़ी
यह मामला अब सिर्फ यातायात बाधा या विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून बनाम दबंगई के संघर्ष में परिवर्तित हो चुका है। यदि ऐसे तत्वों पर समय पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे सरकारी कर्मचारियों का मनोबल कमजोर होगा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
नगर निगम कर्मचारी संघ ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन देकर त्वरित और सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब सभी की नजरें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस मामले में कितनी तत्परता और सख्ती से कार्रवाई करते हैं।
