मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद द्वारा चलाए जा रहे मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय रीठी के अध्ययन केंद्र में बीएसडब्ल्यू और एमएसडब्ल्यू पाठ्यक्रम की कक्षाएँ प्रति रविवार आयोजित की जाती हैं।
इसी शैक्षणिक क्रियाकलाप के तहत, आज धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई। आयोजनों में लोकगीत, नृत्य, भाषण और निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से जनजातीय नायकों की विरासत से युवाओं को जोड़ा गया।
कक्षा की शुरुआत प्रेरणादायक गीत, विचारों और असाइनमेंट निर्माण जैसी नियमित शैक्षणिक गतिविधियों से हुई। इसके पश्चात प्रयोगशाला ग्राम में आने वाली सामाजिक गतिविधियों पर चर्चा हुई। जनअभियान परिषद की शैक्षणिक परंपरा के अनुसार, कक्षा में महत्वपूर्ण त्यौहार, जयंती और महान जन नायकों की पुण्यतिथि पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, और आज का आयोजन भी इसी क्रम में एक अहम पहल रहा।
भगवान बिरसा मुंडा की जयंती समारोह का प्रारंभ उनकी प्रतिमा पर तिलक एवं फूल अर्पित करने से हुआ। इस अवसर पर विकासखंड समन्वयक जगह सिंह मसराम और समाजसेवी अनिल यादव मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में निबंध प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन हुआ, जिसमें छात्रों ने बेहद उत्साह के साथ भाग लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति पर आधारित नृत्य में स्वाति ने अद्भुत प्रदर्शन कर पहला स्थान हासिल किया, जबकि काशी विश्वकर्मा दूसरे स्थान पर रहीं।
गायन प्रतियोगिता में एमएसडब्ल्यू की छात्रा मीनू प्रधान ने पहला और अंजू बर्मन ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता में एमएसडब्ल्यू द्वितीय वर्ष के महेश बर्मन ने पहला स्थान जीता और प्रथम वर्ष के छात्र अतुल बेन ने दूसरा स्थान हासिल किया।
उद्बोधन में परामर्शदाता अरुण तिवारी ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, उनकी संघर्षों, समाज सुधार के लिए प्रयासों और अंग्रेजी शासन के खिलाफ उनके निष्कलंक नेतृत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बिरसा मुंडा न सिर्फ जनजातीय समाज के प्रेरणास्रोत थे, बल्कि न्याय, आत्मसमर्पण और अधिकारों के लिए लड़ाई के प्रतीक भी माने जाते हैं।
विकासखंड समन्वयक ने छात्रों को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने पर जोर दिया। यह आयोजन न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि छात्रों के लिए जनजातीय नायकों की गौरवमयी परंपरा एवं उनके सामाजिक योगदान को समझाने का एक उत्कृष्ट साधन भी साबित हुआ।
