स्लीमनाबाद तहसील के तहत ग्राम कनौजा में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का आयोजन किया गया। इस मौके पर सबसे पहले भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर आदिवासी परंपरा के अनुसार हल्दी चावल से तिलक कर पुष्प अर्पित किए गए और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के चित्र के साथ अन्य सम्माननीय व्यक्तियों को भी याद कर उन्हें फूल चढ़ाए गए। इस कार्यक्रम का संचालन तिरु. देवीसिंह कुलस्ते ने किया, जिन्होंने उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्हें पीला गमझा भेंट कर अभिवादन किया। मंच पर आदिवासी कला के नृत्य की एक शानदार प्रस्तुति दी गई। बेटियों ने विभिन्न आदिवासी गीतों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति को बनाए रखने का संदेश दिया। इस अवसर पर कई जिलों से आदिवासी नेता और अन्य अतिथियों ने भाग लिया। इस समारोह के मुख्य अतिथि नारायण सिंह धुर्वे, कार्यवाहक अध्यक्ष के जी एम म. प्र. की गरिमामयी उपस्थिति में प्रदेश अजाक्स के संयुक्त सचिव सोहन लाल चौधरी ने अपने भाषण में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जैसे क्रांतिकारी हर घर में होने चाहिए, क्योंकि बिरसा मुंडा उस समय आदिवासी समुदाय के संघर्ष के नायक थे। जिन्होंने अपने साहस से अंग्रेजों का सामना किया और जल, जंगल, जमीन की रक्षा की थी। पहले आदिवासियों पर अंग्रेजों ने अत्याचार किया था और यही स्थिति अब भी जारी है। कहीं उनकी भूमि पर कब्जा किया जाता है तो कहीं उनके खिलाफ अमानवीय काम किए जा रहे हैं। यह सिलसिला तब तक चलता रहेगा जब तक आप सब भगवान बिरसा मुंडा जैसे क्रांतिकारियों को अपने युवाओं में नहीं पैदा कर देते। बिरसा मुंडा ने अकेले ब्रिटिश साम्राज्य से लड़ाई करके करोड़ों आदिवासियों को मुक्ति दिलाई थी। भीमआर्मी के जिला अध्यक्ष चंद्रभान बौद्ध और विजय पटेल ने भी आदिवासी समुदाय को संबोधित करते हुए एकजुट होकर पाखंडवाद और जातिवाद के खिलाफ लड़ाई की बात की। उन्होंने कहा कि एससीएसटी और ओबीसी एकसाथ मिलकर भाईचारे के साथ हो रहे अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करेंगे। चुनाव के समय आदिवासी हितैसी बनकर कुछ तथाकथित नेता आपके पास आकर वोट मांगते हैं और फिर पांच वर्षों तक अपनी शक्ल नहीं दिखाते, ऐसे लोगों से समाज को सावधान रहने की आवश्यकता है। उपरोक्त कार्यक्रम में मनीषा सिंह धुर्वे, श्रीमती रेणुका सिंह, गुड्डा प्रसाद रैदास, सुभास चौधरी, संतोष सिंह सैयाम, उमेश पासवान, जयंत कश्यप, चंद्रभान सिंह, दसरथ सिंह, राम चौधरी, अतुल कुमार चौधरी आदि के साथ हजारों की संख्या में महिलाएं और पुरुष मौजूद थे।
