फर्जी सर्टिफिकेट पर क्लर्क बने भृत्य की खोली पोल: कटनी प्रशासन का बड़ा एक्शन, पदावनति के साथ छीना समयमान वेतनमान
विशेष रिपोर्ट | कटनी (मध्य प्रदेश)सरकारी महकमों में फर्जी और कूट रचित दस्तावेजों के सहारे पदोन्नति हासिल करने वाले कर्मचारियों पर कटनी जिला प्रशासन ने बड़ा चाबुक चलाया है। फर्जीवाड़ा कर शासकीय सेवा में पद और आर्थिक लाभ लेने के एक गंभीर मामले में कलेक्टर आशीष तिवारी ने बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 आशाराम राजपूत को तत्काल प्रभाव से उनके मूल पद यानी चतुर्थ श्रेणी भृत्य (चपरासी) पर ढकेल (पदावनत कर) दिया है।प्रशासन ने न केवल कर्मचारी का कद घटाया है, बल्कि अनुचित तरीके से दिए गए वित्तीय लाभों की वसूली का रास्ता साफ करते हुए उनका समयमान वेतनमान भी रद्द कर दिया है।पूरा घटनाक्रम: 2006 की पदोन्नति से लेकर 2020 की आपत्ति तकमामले की जड़ें वर्ष 2006 से जुड़ी हैं, जब आशाराम राजपूत को भृत्य के पद से पदोन्नत कर सहायक ग्रेड-3 (क्लर्क) बनाया गया था। इसके बाद वे वर्षों तक इस पद पर कार्य करते रहे।पेंशन कार्यालय की सजगता से खुली पोल: वर्ष 2019 में जब राजपूत को ‘प्रथम समयमान वेतनमान’ का लाभ देने की प्रक्रिया शुरू की गई, तब जिला पेंशन कार्यालय ने उनकी सर्विस बुक (सेवा पुस्तिका) का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि पदोन्नति के लिए अनिवार्य ‘हिंदी मुद्रलेखन (टाइपिंग) परीक्षा’ उत्तीर्ण करने का कोई भी मूल प्रमाण-पत्र सर्विस बुक में दर्ज ही नहीं था।2020 में पेश किया संदेहास्पद प्रमाण-पत्र: पेंशन कार्यालय की गंभीर आपत्ति के बाद विभाग ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा। मामले को दबाने के लिए आशाराम राजपूत ने नवंबर 2020 में वर्षो पुराना हिंदी मुद्रलेखन परीक्षा उत्तीर्ण करने का एक प्रमाण-पत्र विभाग के समक्ष प्रस्तुत कर दिया।भोपाल से जांच रिपोर्ट आते ही उड़ गए होशशासकीय अभिलेखों में जमा कराए गए इस प्रमाण-पत्र पर संदेह होने पर जिला प्रशासन ने इसकी प्रामाणिकता जांचने के लिए दस्तावेज को सीधे शीघ्रलेखन एवं मुद्रलेखन परीक्षा परिषद, भोपाल भेजा।भोपाल स्थित परिषद के मुख्य रिकॉर्ड और परीक्षा परिणामों से जब प्रस्तुत प्रमाण-पत्र का मिलान किया गया, तो बड़ा खुलासा हुआ। परिषद के आधिकारिक अभिलेखों में राजपूत के नाम से ऐसा कोई प्रमाण-पत्र जारी होना पाया ही नहीं गया। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर कर्मचारी के खिलाफ कड़ी विभागीय जांच (Departmental Enquiry) बैठा दी गई।जांच में सिद्ध हुए आरोप, कलेक्टर ने जारी किया सख्त आदेशविभागीय जांच अधिकारी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि आशाराम राजपूत ने फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार करवाकर कार्यालय को गुमराह किया और नियम विरुद्ध तरीके से पदोन्नति व आर्थिक लाभ प्राप्त किए।जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर आशीष तिवारी ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-10 का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए:सहायक ग्रेड-3 से भृत्य पद पर पदा वनति: राजपूत को तत्काल प्रभाव से क्लर्क के पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी भृत्य बनाया गया।ढीमरखेड़ा तबादला: पदाव नत करने के साथ ही उनका तबादला ‘कार्यालय परियोजना अधिकारी, बाल विकास परियोजना ढीमरखेड़ा’ में कर दिया गया है।समयमान वेतनमान निरस्त: वर्ष 2019 में स्वीकृत किया गया प्रथम समयमान वेतनमान का आदेश पूरी तरह से निरस्त कर दिया गया है, जिससे अब उनसे पूर्व में भुगतान की गई अतिरिक्त राशि की रिकवरी भी की जाएगी।फर्जीवाड़ा करने वालों में मचा हड़कंप कटनी प्रशासन की इस सख्त और पारदर्शी कार्रवाई से जिला कार्यालयों में हड़कंप मच गया है। कलेक्टर आशीष तिवारी के इस आदेश ने साफ संदेश दिया है कि फर्जी दस्तावेजों के बल पर शासन को चूना लगाने वाले कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे मामला कितना भी पुराना क्यों न हो।

