इंदौर दूषित पानी कांड क़ो लेकर भाजपा कांग्रेस आमने सामने पुलिस ने कांग्रेस क़ो खड़ेदा

latest katni news today मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान के खिलाफ मुड़वारा विधायक के निवास के बाहर कांग्रेस का घंटा बजाओ प्रदर्शन। भाजपा के कार्यकर्ता और विधायक के समर्थन में उपस्थित लोग आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों से नारेबाजी जारी रही, जहां एक तरफ भगवान के जयकारे लगाए जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस मुर्दाबाद के नारे लगाती रही। मौके पर सुरक्षा हेतु कोतवाली पुलिस तैनात थी। विधायक के निवास के सामने सड़क पर कांग्रेस के कार्यकर्ता बैठे हुए थे।

बरगवा स्थित लाल पहाड़ी पर भूमाफिया की नजर

latest katni news today हर के मध्य बरगवां में मौजूद लाल पहाड़ी की बहुमूल्य सरकारी संपत्ति पर भूमाफियाओं की रुचि बढ़ने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ है। कलेक्टर के आदेश पर लाल पहाड़ी की सीमाओं का निर्धारण और जांच के लिए एक प्रशासनिक जांच टीम बनाई गई है, जो सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। राजस्व विभाग के पुराने दस्तावेजों के मुताबिक, मिसल रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1906-07 में ग्राम बरगवां के खसरा नंबर 209, जिसका क्षेत्रफल 69.55 एकड़ है, को सरकारी पहाड़ के रूप में दर्ज किया गया था। फिर भी, समय के साथ इस भूमि पर अतिक्रमण के प्रयास बढ़ते गए हैं। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से सरकारी ज़मीन का कुछ हिस्सा व्यक्तिगत नाम पर दर्ज किया गया है। वर्तमान राजस्व अभिलेखों के अनुसार खसरा नंबर 209 के बटांकन के तहत खसरा नंबर 209/5, जिसका क्षेत्रफल 0.2630 हेक्टेयर है (लगभग 28 हजार 300 वर्गफुट), को निजी नाम पर दर्ज किया गया है। यह चौंकाने वाली बात है कि इस सरकारी पहाड़ी के हिस्से को किस आदेश या प्रक्रिया के तहत निजी नाम में दर्ज किया गया, इसका स्पष्ट उल्लेख रिकॉर्ड में नहीं मिलता। हाल ही में लाल पहाड़ी के आसपास फिर से अतिक्रमण की गतिविधियाँ शुरू होने के बाद प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। एसडीएम प्रमोद चतुर्वेदी द्वारा सीमांकन के लिए चार सदस्यीय एक जांच दल गठित किया गया है। इस जांच दल में प्र. नायब तहसीलदार हर्ष रामटेके, राजस्व निरीक्षक सी.एस. कोरी, पटवारी धर्मेन्द्र ताम्रकार और संदीप गर्ग शामिल हैं। यह दल सीमांकन करके अवैध निर्माणों की पहचान करेगा और यह जांच करेगा कि यदि भूमि सरकारी रही है, तो उसे निजी नाम पर दर्ज करने की अनुमति किस स्तर से दी गई। प्रशासन का कहना है कि अगर जांच में कोई अनियमितताएँ सामने आईं, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष पाकर हम सभी धन्य : PM मोदी

नई दिल्ली । शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरहवा अवशेषों की एक शानदार अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत की विरासत, जो सवा सौ सालों के लंबे इंतजार के बाद लौटी है, अब भारतीय जनता के समक्ष उपलब्ध है। आज से लोग इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे और भगवान बुद्ध का आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे। मुझे इस शानदार अवसर पर उपस्थित सभी सम्माननीय अतिथियों का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है।
उन्होंने आगे बताया कि 2026 की शुरुआत में यह कार्यक्रम बड़ा प्रेरणादायक है और मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि 2026 में यह मेरा पहला सार्वजनिक आयोजन है, जो भगवान बुद्ध के चरणों से शुरू हो रहा है। मेरी इच्छा है कि भगवान बुद्ध के आशीर्वाद से 2026, पूरे विश्व के लिए शांति, समृद्धि और सद्भाव का एक नया अध्याय लेकर आए। प्रदर्शनी का यह स्थान भी अद्वितीय है। किला राय पिथौरा भारत के समृद्ध इतिहास का एक महत्त्वपूर्ण स्थल है।
उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को हमारे बीच पाकर हम सभी धन्य महसूस कर रहे हैं। इनका भारत से बाहर जाना और वापस लौटना, दोनों ही महत्वपूर्ण अवसर हैं। यह एक संदेश है कि गुलामी केवल राजनीतिक और आर्थिक नहीं होती, बल्कि यह हमारी विरासत को भी खत्म कर देती है। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भी ऐसे ही एक समय में भारत से छीन लिए गए थे। यह अवशेष सवा सौ साल से अधिक समय तक भारत से बाहर रहे। इसलिए, इन पवित्र अवशेषों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचना का प्रयास किया गया। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भारत के लिए हमारी सभ्यता का एक अभिन्न हिस्सा हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भगवान बुद्ध का ज्ञान और उनके द्वारा दिखाया गया मार्ग, पूरी मानवता के लिए है। इस भाव को हमने पिछले कुछ महीनों में बार-बार अनुभव किया है। हाल के महीनों में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष जिन देशों में गए, वहां विश्वास और श्रद्धा का एक अपार सैलाब देखा गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध सभी के हैं और सबको एकत्र करते हैं। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं, क्योंकि भगवान बुद्ध का मेरे जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। जहां मैं वडनगर में पैदा हुआ, वह बौद्ध शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था। जिस स्थान पर भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया, सारनाथ, आज मेरी कर्मभूमि बनी हुई है। भारत न केवल भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का रक्षक है, बल्कि उनकी परंपरा का जीवित वाहक भी है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध से संबंधित अवशेष उनके संदेश की जीवित उपस्थिति को दर्शाते हैं।

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