कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे को मिली बड़ी राहत

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में कांग्रेस के विधायक अनुभा मुंजारे पर उठे रिश्वत मांगने के आरोपों का मामला अब समाप्त हो चुका है। जांच के बाद उन्हें क्लीन चिट मिल गई है। उत्तर सामान्य वनमंडल की डीएफओ नेहा श्रीवास्तव ने विधायक पर आरोप लगाया था कि उन्होंने दो-तीन पेटी पैसे की मांग की, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल पैदा हुई थी। लेकिन अब जांच रिपोर्ट में इन आरोपों को निराधार पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, रेस्टहाउस में मौजूद किसी भी व्यक्ति ने यह नहीं कहा कि विधायक ने पैसे की मांग की थी। इस मामले की जांच के लिए एक दो सदस्यीय टीम बनाई गई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आरोपों की कोई पुष्टि नहीं हुई। इसके परिणामस्वरूप विधायक को क्लीन चिट मिल गई है। अनुभा मुंजारे ने कहा कि यह पूरी घटना राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के निर्देश पर यह षड्यंत्र रचा गया और पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन तथा उनकी बेटी मौसम हरिनखेड़े इस साजिश के मुख्य सूत्रधार थे। उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया, लेकिन सच्चाई की विजय हुई। झूठ का चेहरा बेनकाब हो गया।”
उन्होंने आगे उल्लेख किया कि भाजपा ने आंबेडकर चौक पर उनके परिवार के खिलाफ व्यक्तिगत हमले किए और उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया। हालांकि, जांच रिपोर्ट ने सारे तथ्य स्पष्ट कर दिए हैं। क्लीन चिट मिलने के बाद, जिले की राजनीति में फिर से हलचल बढ़ गई है।
इस बीच, डीएफओ नेहा श्रीवास्तव और उनके पति अधर गुप्ता की समस्याएं बढ़ गई हैं। शासन ने नेहा श्रीवास्तव से एक टेंडर विवाद के मामले में सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। वहीं, डीएफओ अधर गुप्ता पर बाघ की संदिग्ध मृत्यु और नियमों के उल्लंघन में शव को जलाने के आरोप भी तय किए गए हैं। प्रशासन ने उनके खिलाफ 170 से अधिक चार्जशीट पेश की हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने जिले की राजनीति को ना केवल हिलाकर रख दिया, बल्कि अब जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो रहा है कि मामला पूरी तरह विधायक के पक्ष में जाता हुआ दिखाई दे रहा है।

हिंदू राष्ट्र के जवाब में मुस्लिम राष्ट्र, मुसलमान यात्रा

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना देखने वाले लोगों को नेपाल और श्रीलंका के हालात पर नजर डालनी चाहिए। यदि वे समझते नहीं हैं, तो जो वहाँ हुआ, वही यहाँ भी दोहराया जा सकता है। बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री (बाबा बागेश्वर) की ओर से दिल्ली से वृंदावन तक आयोजित होने वाली सनातन हिंदू एकता पदयात्रा पर मौलाना साजिद रशीदी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि इस तरह की पदयात्राओं का धर्म से कोई सरोकार नहीं है, ये सिर्फ सोशल मीडिया पर ध्यान खींचने के लिए होती हैं। उन्होंने इस यात्रा को राजनीतिक गतिविधि करार देते हुए यह कहा कि यदि ऐसा चलता रहा तो मुसलमान भी अपनी पदयात्रा निकालेंगे।
‘यदि मैं मुस्लिम यात्रा निकालूँ तो केस दर्ज होंगे’
मौलाना रशीदी ने आगे कहा कि ये लोग हिंदू राष्ट्र का नारा लगा रहे हैं, लेकिन यदि साजिद रशीदी मुस्लिम राष्ट्र के लिए यात्रा शुरू करें तो उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। सिमी को भी इसी कारण रोका गया था क्योंकि वह मुस्लिम राष्ट्र की मांग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह यात्रा राजनीतिक है। जो कथावाचक 15-20 लाख रुपये के लिए कथा सुनाता है, वह धार्मिक कैसे हो सकता है? ये एक व्यापारी हैं, बाबा नहीं। जो व्यक्ति महिलाओं के बारे में बेज़ा बातें करता हो, वह धार्मिक हो सकता है क्या? मौलाना रशीदी ने ये भी कहा कि बागेश्वर की पदयात्रा में 300 नहीं, केवल 30 या 3 लोग शामिल होंगे। यात्रा में शामिल मुस्लिम लोग राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के सदस्य हैं, जो ना हिंदू हैं और ना मुसलमान। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रकार की पदयात्राओं को सरकार का संरक्षण मिलता है और बाबा बागेश्वर को बच्चा बताकर उन्होंने ऊटपटांग बातें करने का आरोप लगाया। यदि वे नहीं माने तो जो नेपाल में हुआ, वही यहाँ पुनः होगा।
साजिद रशीदी ने बाबा बागेश्वर की पदयात्रा के संकल्प पर भी तीखे शब्दों में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पीएम से लेकर चपरासी तक सभी हिंदू हैं और देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की बात की जा रही है। मुसलमान तो मुख्यमंत्री भी नहीं बनते हैं। रामराज्य का यह दृश्य असंभव है। जिन लोगों में भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की सोच है, उन्हें नेपाल और श्रीलंका का उदाहरण देखना चाहिए। अगर नहीं मानते हैं, तो जो नेपाल में घटित हुआ, वही यहाँ भी हो सकता है। फिर मुस्लिम राष्ट्र के विचार पर भी गहनता से विचार करना पड़ेगा।
मौलाना यहीं नहीं थमे। उन्होंने कहा कि ऐसी पदयात्राएँ आयोजित करने वालों के मस्तिष्क में नकारात्मक विचार हैं। समाज को आगे बढ़ाने की दृष्टि से, ऐसी यात्राओं से केवल नफरत ही विकसित होती है। इसी प्रकार से आगे बढ़ा तो मुसलमान भी अपने यात्रा का आयोजन करेंगे। यदि धीरेंद्र शास्त्री हिंदू राष्ट्र की बात को नहीं मानते, तो हमें भी मुस्लिम राष्ट्र के विषय पर विचार करना होगा।

मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालु की मौत

मथुरा के प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में एक बार फिर अव्यवस्था का सामना करना पड़ा है। दर्शन करने आए एक भक्त की आकस्मिक मृत्यु हो गई, जिसके बाद गोस्वामी समाज ने मंदिर को पवित्र करने के लिए यमुना का जल छिड़का। यह घटना न केवल भक्तों को चौंका गई, बल्कि मंदिर के प्रशासन और हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदिर में दर्शन हेतु आए एक बुजुर्ग श्रद्धालु अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा गया कि व्यक्ति बैठते-बैठते जमीन पर गिर गए और थोड़ी देर बाद उनका निधन हो गया। यह बताया गया कि मंदिर में इतनी भीड़ थी कि तुरंत सहायता नहीं मिल पाई। इससे पहले भी इस मंदिर में ऐसी घटनाएं घटित हो चुकी हैं।
घटना के पश्चात गोस्वामी समाज ने मंदिर को बंद कराकर यमुना के किनारे से जल लाकर पूरे परिसर में छिड़काव किया। मंदिर के अंदर तथा उस जगह भी जहां श्रद्धालु का निधन हुआ, यमुना जल डाला गया। गोस्वामी समाज का कहना है कि यह प्रक्रिया मंदिर की शुद्धि और मृत आत्मा की शांति के लिए की गई है।
मंदिर के गोस्वामी हिमांशु ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दो श्रद्धालुओं का निधन हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी के द्वारा आखिर क्या कार्रवाइयां की जा रही हैं? भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था को क्यों नहीं सुनिश्चित किया जा रहा? उन्होंने यह भी बताया कि लगातार हो रही घटनाओं से भक्तों में भय और असंतोष बढ़ता जा रहा है।

ग्वालियर से दबोचा गया सूदखोर वीरेंद्र तोमर, 151 दिन से फरार था 

छत्तीसगढ़ की रायपुर पुलिस ने गंभीर मामलों जैसे सूदखोरी, रंगदारी और अवैध हथियार रखने के आरोप में फरार चल रहे हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र सिंह तोमर, जिसे रूबी सिंह तोमर के नाम से भी जाना जाता है, को अंततः गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसे मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से पकड़ा, जहां वह साधारण कपड़े पहनकर पहचान छिपाने की कोशिश कर रहा था। वीरेंद्र तोमर पिछले 151 दिनों से पुलिस से बचते-बचते भाग रहा था। इस खोजना काम में पुलिस को कई राज्यों में टीमें भेजनी पड़ी थी। अंदरूनी जानकारी के अनुसार, वह गिरफ्तारी से बचने के लिए जगहें लगातार बदल रहा था और फर्जी पहचान के माध्यम से विभिन्न शहरों में रह रहा था। उसकी गिरफ्तारी रायपुर पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
रायपुर पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि ग्वालियर से पकड़ने के बाद वीरेंद्र तोमर को जल्द ही रायपुर लाया जाएगा, जहां उससे पूछताछ की जाएगी। पुलिस को संदेह है कि फरारी के दौरान वह अपने नेटवर्क के माध्यम से सूदखोरी का व्यापार जारी रखे हुए था।
वीरेंद्र तोमर पर कई आपराधिक मामले शिकायत में हैं, जिनमें अवैध वसूली, धमकी और रंगदारी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, वह लोगों को ऊँचे ब्याज दर पर पैसे उधार देता था और कर्ज चुकाने में चूक होने पर उन्हें धमकाकर वसूली करता था। इसके अलावा, वह अपने गुर्गों की मदद से क्षेत्र में डर का माहौल भी बनाता था।
पुलिस सूत्रों ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद मामले की गहराई तक जाने के लिए एक विशेष टीम बनाई जाएगी। इस टीम का कार्य तोमर के सहायक लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कदम उठाना होगा। इस बीच, उसके फरार साथी रोहित की खोज अभी भी जारी है।

फीस विवाद से नाराज छात्र ने कॉलेज में लगाई खुद को आग

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक अत्यंत दुखद घटना प्रकाश में आई है। यहां के डीएवी कॉलेज में बीए तीसरे वर्ष के छात्र उज्जवल राणा ने फीस के विवाद के चलते कॉलेज के परिसर में अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की। छात्र को आग में घिरा देखकर कॉलेज में हड़कंप मच गया। वहां उपस्थित अन्य विद्यार्थियों ने बैग और कपड़ों का इस्तेमाल कर आग बुझाई और पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने गंभीर रूप से जल चुके छात्र को तुरंत अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसकी नाज़ुक स्थिति के कारण उसे मेरठ में रेफर किया गया। जानकारी के अनुसार, उज्जवल राणा को कॉलेज में 7,000 रुपये की फीस जमा करनी थी, जिसमें उसने 1,750 रुपये जमा किए थे। बाकी राशि न दे पाने के कारण कॉलेज प्रशासन ने उसका परीक्षा फॉर्म लेने से मना कर दिया। छात्र ने आरोप लगाया कि इस दौरान कॉलेज के प्रिंसिपल प्रदीप कुमार ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया और पुलिस के साथ मिलकर उसे परेशान किया। इस मानसिक तनाव के चलते उसने यह अत्यंत गंभीर कदम उठाया।
घटना से एक दिन पहले उज्जवल ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें उसने कॉलेज प्रशासन और कुछ पुलिसकर्मियों पर मारपीट और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। उस वीडियो में छात्र ने कहा, “अगर मैं कुछ गलत कदम उठाता हूं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रिंसिपल और संबंधित पुलिसकर्मियों की होगी।”
इस घटना के बाद कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों और आसपास के ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। पीड़ित छात्र के परिजन भी कॉलेज के गेट पर धरने पर बैठ गए और आरोपियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग की।

error: Content is protected !!